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आपदा प्रबंधन की मिसाल—सिल्क्यारा, जोशीमठ, धराली और नंदा चौकी में सक्रिय नेतृत्व दिखाते रहे मुख्यमंत्री धामी

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आपदा प्रबंधन की मिसाल—सिल्क्यारा, जोशीमठ, धराली और नंदा चौकी में सक्रिय नेतृत्व दिखाते रहे मुख्यमंत्री धामी

 

उत्तराखंड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं और आपात परिस्थितियों के दौरान स्वयं मोर्चा संभालते हुए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाई है। इसी सप्ताह देहरादून में नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड 12 घंटे के भीतर ठीक किया जाना इसका उदाहरण है।

विगत दिनों देहरादून – अंबाला हाईवे पर स्थित नन्दा की चौकी पुल की एप्रोच रोड भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हो गई थी। जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री धामी ने लोनिवि के वरिष्ठ अधिकारियों का मौके पर भेजकर, बारिश के बीच ही एप्रोच रोड ठीक करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन और अन्य एजेंसियों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए करीब 12 घंटे के भीतर ही एप्रोच रोड ठीक कर पुल पर यातायात बहाल कर दिया। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा नवंबर 2023 में उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग दुर्घटना के दौरान हुई। सुरंग में 41 श्रमिकों के फंसने की सूचना आने के बाद सीएम धामी ने मौके पर ही डेरा डालते हुए, राहत एवं बचाव अभियान की सीधी निगरानी की। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय एजेंसियों, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ तथा देश-विदेश के सुरंग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर 17 दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की। अंततः सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान को बाद में ब्रिक्स देशों के आपदा प्रबंधन ग्रुप ने भी ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में सराहा है। वहीं, इस ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन पर अब अभिनेता आमिर खान और निर्देशक कबीर खान ने फिल्म बनाने की भी घोषणा की है।

 

इसके अलावा वर्ष 2025 में उत्तरकाशी के धराली-हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के दौरान भी मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा परिचालन केंद्र से लगातार निगरानी की। उन्होंने खराब मौसम के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया, राहत शिविरों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सेना, वायुसेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ के संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान की नियमित समीक्षा करते हुए फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

चारधाम यात्रा के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध और अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों में भी मुख्यमंत्री लगातार सक्रिय रहे हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर मार्ग अवरुद्ध होने की घटनाओं के दौरान उन्होंने कंट्रोल रूम से लेकर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचकर राहत कार्यों की समीक्षा की। वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था, यात्रियों के ठहरने, भोजन, चिकित्सा सहायता और मार्गों को शीघ्र खोलने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

जोशीमठ भू-धंसाव संकट के दौरान भी मुख्यमंत्री ने कई बार प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत शिविरों, पुनर्वास व्यवस्था और मुआवजा वितरण की समीक्षा की। इसी तरह मानसून के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में भूस्खलन और सड़क क्षति की घटनाओं में भी मुख्यमंत्री नियमित रूप से आपदा नियंत्रण कक्ष से जुड़े रहे और जिला प्रशासन को त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश देते रहे।

 

 

*”हमारे लिए आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि ये प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा का संकल्प भी है। हमारी प्राथमिकता है कि किसी भी संकट की स्थिति में सरकार और प्रशासन सबसे पहले प्रभावित लोगों तक पहुंचे, राहत एवं बचाव कार्यों में कोई कमी न रहे और सभी एजेंसियों के समन्वय से जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जाए।”*

*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

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By admin

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